ZERO
जीरो कि खोज आर्यभट्ट ने कि ऐसी पूरी दुनिया मानती है |(वो बात अलग है कि जीरो बहुत पहले ही वैदिक-गणित मे प्रयोग होता रहा है )
अब जरा कल्पना कीजिए कि जीरो के बिना ये दुनिया कैसे हो जायेगी | प्राकृतिक विज्ञान,प्रद्योगिकी सभी निरर्थक है इसके बिना | वर्तमान कि बात करूँ तो जो आप कंप्यूटर अभी इस्तेमाल कर रहे है ,वो भी पूरी तरह जीरो पर आश्रित ह......ै ;क्यूंकि कंप्यूटर बाइनरी –आंकिक सिद्धांत पर कार्य करता है जो कि सिर्फ ०-१ से बनता है |
मै समझता हूँ मेरा एक यही उदहारण पर्याप्त है उन लोगों के लिए जो हमारे देश कि संस्कृति ,धर्म कि आलोचना करते रहते हैं | उन्हें हमारी संस्कृति कि केवल खामियां दिखाई देती हैं ,समृधि और अच्छाई तो दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती |..................................................SRT
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