इसे बात पर मुझे एक गधे और यात्री की कहानी याद आ गयी जो मैंने सुनी थी और कही से पढ़ा भी था ----
एक यात्री अपने छोटे लड़के को गधा पे बैठा के यात्रा कर रहा था | रस्स्ते मे लोग मिले और उनपर कटाक्ष किये --"क्या जमाना है बाप पैदल और बेटा गधे पर |"य...ात्री ने कुछ सोचा और खुद गधे पर बैठ गया अभी कुछ ही दूर आगे गए नहीं की एक आदमी बोला"कैसा कलयुग है भाई नन्हे बेटे को रूखे-कंटिली जमीन पर चला रहा है ये बाप और खुद मटरगस्ती कर रहा है|"फिर यात्री कुछ सोचा और इसबार दोनों गधे पर बैठकर पहाड़ की चढ़ाई करने लगे रस्ते मे लोग मिलते और उनपर व्यंग्य करते "इंसान है की राक्षस है गधे की जान ये लोग ले लेंगे |"फिर यात्री कुछ सोचकर खुद भी पैदल और बेटे को भी पैदल कर ख़ाली गधे के साथ चलने लगा ---रस्ते मे लोग मिलते और खूब जोर से उनपर इसारा कर -कर के हँसते ,बोलते"कैसे बेवक़ूफ़ लोग है खुद पैदल है और गधे को खाली रख छोरा है और यात्रा कर रहे है |
तब यात्री सोचने लगा कुछ भी करो लोग आपका मजाक उड़ायेंगे ही,निंदा करना तो लोगो की आदत ही है,इसीलिए जो उचित लगे वही करना चाहिए|

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