Thursday, March 17, 2011

एक उदासी -होली के बहाने

दोस्तों मै एक ऐसे जगह रहता हूँ जो देश मे होते हुए भी एक अलग देश लगता है |यहाँ होली मनाई तो जाती ही नहीं है, यदि कोई मानना भी चाहे तो वो मना नहीं सकता ,क्यूंकि यंहा इस राज्य मे होली का विरोध होता है| राज्य का नाम है "तमिलनाडु"------------शायद इसके पीछे मुझे कारण समझ मे आता है ,हिरंद्य्कस्यप और उसकी बहन होलिका ,तमिलनाडु और केरला के बिच के ही थे ,,या फिर केरला,आंध्र ,तमिलनाडु ,और कर्नाटका जब संयुक्त राज्य थे तब हिरंद्यक्स्याप यहाँ का राजा हुआ करता होगा ,उसके बाद प्रह्लाद और बाद मे राजा बलि आया ,रजा बलि काफी ताकतवर हों गया था देवताओं से भी जाएदा जिसके लिए ही केरला के लोग मुख्यतः ओनम मनाते है ,इसमे सभी धर्म के लोग खासकर इसाई समुदाय ख़ास रूचि लेता है |यहाँ के इसाई साधारणतः हिन्दू ही है पर इसाइयत का अनुसरण कर लिए हैं ,जैसे वे की औरतें आज भी साड़ियाँ ,चूड़ियाँ पहनती है और कुछ लोग सिन्दूर तक भी करते हैं ,पुरुष आज भी जो क्रूस पहनते है वो तुलसी माला की तरह होता है,हिन्दुओं की तरह हाथ मे रक्षा { पवित्र धागा} बांधते हैं | बात करते-करते मै कहाँ से कहाँ पहुँच जाता हूँ ,शायद आपलोग हँस रहे होंगे की मै क्या बक बक कर रहा हूँ ,हा हा हा हा कोई बात नहीं, बात यह है की मेरा मन नहीं लग रहा है यहाँ ,होली है न, और मै चाह के भी अपने प्यारे त्योहार होली को मना नहीं सकता |................................ SRT

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